राजनीति का चारित्रिक पतन और बयानबाजी

siddhu-yeddi
बयानों के बम से विरोधियों को ध्‍वस्‍त करने के उस्‍ताद

कर्नाटक में विधानसभा के चुनाव पास आने के साथ ही बयानबाजी का दौर भी तेज होता जा रहा है। मुख्‍यमंत्री सिद्धरामैया और बीएस येड्यूरप्‍पा के बीच चल रही जुबानी जंग रोज तल्‍ख होने के साथ ही गिरावट की ओर बढ़ती जा रही है। देख कर हैरत हाेती है कि सत्ता की भूख के चलते नेता एक दूसरे को किस हद तक गिर कर बेइज्‍जत करने पर आमादा हो सकते हैं। जनता इस सबको देखने के लिए विवश है। इस खेल में जनता कहीं नहीं है, कहने का यह जनतंत्र है।

कर्नाटक की एक अग्निमुख महिला राजनेता हैं, जिन्‍हें भाजपा ने इसी काम का जिम्‍मा दे रखा है। उन्‍होंने कई बार गैर जिम्‍मेदाराना बयान दिए हैं लेकिन इस बार उन्‍होंने तमाम हदों को पार करते हुए एक फेक न्‍यूज़ पर ट्वीट किया और एक नाबालिग छात्रा के साथ जेहादियों की कथित ज्‍यादतियों और हिंसा की बात करते हुए राज्‍य में कानून व्‍यवस्‍था खत्‍म होने का आरोप लगा दिया। जाहिर है कि काल्‍पनिक घटना के बारे में लिखने पर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, लेकिन सांसद महोदया ने सरकार को चुनौती दी है कि उन्‍हें गिरफ्तार कर के दिखाएं।

भाजपा के नेता लगातार कर्नाटक सरकार को बेहद आक्रामक तरीके से निशाना बनाने की कोशिश करते आ रहे हैं। पहले केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने मुख्‍यमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्‍तेमाल किया था। बीएस येड्यूरप्‍पा लगातार जहर उगलने वाले बयान देते रहते हैं। मतलब यह कि भाजपा के पास इस राज्‍य में कोई मुद्दा नहीं है इसलिए लगातार झूठ का प्रोपेगैंडा करने और जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं।

कर्नाटक में चुनाव होने में अभी कम से कम 5-6 महीने का समय है। तब तक यह बयानों के बम चलते रहेंगे अौर राज्‍य की जनता चुपचाप इसे झेलने पर मजबूर रहेगी। हालांकि बयानबाजी में सिद्धरामैया भी कम नहीं हैं और उन्‍होंने भी कोई कसर नहीं छोड़ी है लेकिन उनका निशाना येड्यूरप्‍पा पर होता है और अक्‍सर वे सिर्फ उनके जेल जाने और भ्रष्‍टाचार में शामिल होने की बात को उछालते रहते हैं।

अब सुनने में आ रहा है कि भाजपा ने राज्‍यपाल की मदद से सिद्धरामैया के खिलाफ भी अभियोजन की अनुमति लेकर उन्‍हें दागी करने का प्‍लान बनाया है। राज्‍यपाल वजूभाई वाळा के बारे में कहा जा रहा है कि वे कर्नाटक से जाने की तैयारी कर चुके हैं। तो जाते-जाते हो सकता है वे यह काम करते जाएं। तब भाजपा को सीएम के खिलाफ भुनाने के लिए एक ताजा और ठोस मुद्दा मिल जाएगा। लेकिन इसमें शक है कि ऐसा होगा…

बकौल सिद्धरामैया, येड्यूरप्‍पा खाली टोकरी (साँप बंद करने की पिटारी) उठाए घूम रहे हैं और लोगों को साँप छोड़ देने की खोखली धमकी देकर डराने की कोशिश कर रहे हैं।

राजनेताओं का बयानबाजी करना लोकतंत्र का अभिन्‍न अंग है। कभी यह गंभीर मुद्दों पर अपनी बात रखने के लिए होता था, फिर अपने विरोधियों से मुकाबले के लिए इसका उपयोग शुरू हो गया और अब यह इन सबके साथ झूठ को फैलाने, राजनीतिक विरोधियों के चरित्र हनन और आत्‍मश्‍लाघा का रूप ले चुका है। चुनाव प्रचार के दौरान इसका सबसे वीभत्‍स रूप देखने को मिलता रहा है लेकिन अब इसके लिए चुनाव प्रचार की जरूरत नहीं है। मीडिया और साथ में सोशल मीडिया ने नेताओं की इस क्षुधा का शांत करने का सशक्‍त मंच उपलब्‍ध करा दिया है। हैरत की बात सिर्फ इतनी है कि यह भूख मिटती नहीं, बढ़ती ही जाती है।

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