संजय उवाच… जो भी जैसा मैंने देखा

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हमारे इर्द गिर्द रोज बहुत कुछ घट रहा है और इन सबका असर हमारी जिंदगी पर भी होता है। मैंने हमेशा से इन घटनाओं पर अपने विचार बेबाकी से रखने की हिम्‍मत की है और आगे भी करता रहूंगा। यह ब्‍लॉग मेरे अनुभवों का दस्‍तावेजीकरण है। इसे निर्माणाधीन इसलिए कह रहा हूँ क्‍योंकि जब तक मैं लिखता रहूँगा यह बनता रहेगा और यह प्रक्रिया हमेशा चलती रहेगी। इसलिए यह हमेशा निर्माणाधीन ही रहेगा।

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